
देशपाल सिंह पंवार
उसकी शक्ल हंसाती है। अक्ल चिढ़ाती है। दंगल कराती है। शगल बनाती है। बगल रिझाती है। नकल कमाती है। उसका खाना, पीना, उठना,बैठना,चलना, पहनना,बोलना, जूझना,घूरना, ताड़ना,मांगना, हड़काना, करना, लड़ना सब खबर है। हर दम हाल-चालजानने को जनता बेसब्र है। उसपर हर दम मीडिया की नजर है। उसकी हर खबर सबसे बड़ी खबर है। वो फेम है। सबसे बड़ा ब्रैंड नेम है। उसका नाम बिकता है। असली भी और नकली भी, नकल राजनीति में है। खिलौनों में है। रेल में है। खेल में है। इल्म में है। फिल्म में है। चाल में है। ढाल में है। टीवी में है। बीवी में है। खैनी में है। सत्तू में है। कुल्हड़ में है। बिस्कुट में है। तिल्कुट में है। सैलून में है। बैलून में है। चाकलेट में है। पेय पदार्थों की क्रेट में है। कास्मेटिक पैक में है। क्रीम में है। पाउडर में है। ड्रेस में है। सेंस में है। मेन्स में है। वोमेन्स में है। ओल्ड में है। गोल्ड में है। यंग में है। जंग में है। रंग में है। भंग में है। लफड़े में है। कपड़े में है। लाठी में है। बाटी में है। उसे बेचकर-कोसकर अमीर बनने वाले नकलचियों, धंधेबाजों को नहीं कोई शेम है। वो पक्का बिहारी है। उसका गंवई अंदाज सब पर भारी है। उसकी सोच न्यारी है। उसके प्रबंधन पर सारी दुनिया वारी है। वो सबको दौड़ाता है। सब उसे बुलाते हैं। पढ़े-लिखे उसे सुनते है। गुनते है। वो पटरी से उतरी रेल की मेल को सुपर फास्ट की तरह दौड़ाता है। गरीब रथ चलाता है। टैक्स नहीं लगाता है। पर अविश्सनीय मुनाफा दर्शाता है। पांच साल में सारे रिकार्ड तोड़ जाता है। वो दिल्ली में करम का धनी है पर बिहार में किस्मत का। रेल में पास-बिहार में फेल। जातिवाद,अपहरण उद्योग, खून खराबा, निजी सेनाओं व नक्सलियों की समानांतर सरकार, अपराधियों की राजनीति, दागियों की सरकार व दल में बेशुमार, हर फाइल में घपले-घोटाले,लूट-खसोट, चौपट धंधे, रोते बंदे, इरादे गंदे, जनता हलाल-नातेदार, रिश्तेदार कंगाल से मालामाल और विकास की जगह विनाश का जंगलराज इसी तरज पर 15 साल लालू राज का बेसुरा साज बजा। हेमा के गाल की तरह सड़कें तो नहीं बनीं हां लोग सड़कें ढंूढनें में लंगड़े-लूले जरूर होते गए। कश्मीर के आतंकवाद से ज्यादा वहां 15 साल में खून बहा। वो मीडिया को कोसता गया। विरोधियों को दुत्कारता गया। उसका घमंड सबको नीचा दिखाता गया। बिहार का नाम बदनाम हुआ। बिहारी बदनाम हुआ। पर उसका सिक्का चलता रहा। वो किसी के काबू में नहीं रहा पर सबको काबू में करता गया। बिहार में ना सही तो दिल्ली और देश में सही। सब जानते हैं-वो राजनीति में अविश्वसनीय है। हर दम चाल चलता है। जो हाथ मिलाता है उसे ही हलाल कर जाता है। फिर भी वो कमाल कर जाता है। पर इस बार हर दिमाग में यही सवाल है कि आखिर रेल की तरह बिहार को ड्राइव करने की बजाय उसने ड्राई क्यों बनाया? यही सवाल इस बार चुनाव में उसका पीछा कर रहा है। यही नीचा दिखा रहा है। क्या होगा समय बताने वाला है? लेकिन फिलहाल तो यही कहना पड़ेगा कि सब्जी में आलू और राजनीति में लालू का कोई जोड़ नहीं।
उसकी शक्ल हंसाती है। अक्ल चिढ़ाती है। दंगल कराती है। शगल बनाती है। बगल रिझाती है। नकल कमाती है। उसका खाना, पीना, उठना,बैठना,चलना, पहनना,बोलना, जूझना,घूरना, ताड़ना,मांगना, हड़काना, करना, लड़ना सब खबर है। हर दम हाल-चालजानने को जनता बेसब्र है। उसपर हर दम मीडिया की नजर है। उसकी हर खबर सबसे बड़ी खबर है। वो फेम है। सबसे बड़ा ब्रैंड नेम है। उसका नाम बिकता है। असली भी और नकली भी, नकल राजनीति में है। खिलौनों में है। रेल में है। खेल में है। इल्म में है। फिल्म में है। चाल में है। ढाल में है। टीवी में है। बीवी में है। खैनी में है। सत्तू में है। कुल्हड़ में है। बिस्कुट में है। तिल्कुट में है। सैलून में है। बैलून में है। चाकलेट में है। पेय पदार्थों की क्रेट में है। कास्मेटिक पैक में है। क्रीम में है। पाउडर में है। ड्रेस में है। सेंस में है। मेन्स में है। वोमेन्स में है। ओल्ड में है। गोल्ड में है। यंग में है। जंग में है। रंग में है। भंग में है। लफड़े में है। कपड़े में है। लाठी में है। बाटी में है। उसे बेचकर-कोसकर अमीर बनने वाले नकलचियों, धंधेबाजों को नहीं कोई शेम है। वो पक्का बिहारी है। उसका गंवई अंदाज सब पर भारी है। उसकी सोच न्यारी है। उसके प्रबंधन पर सारी दुनिया वारी है। वो सबको दौड़ाता है। सब उसे बुलाते हैं। पढ़े-लिखे उसे सुनते है। गुनते है। वो पटरी से उतरी रेल की मेल को सुपर फास्ट की तरह दौड़ाता है। गरीब रथ चलाता है। टैक्स नहीं लगाता है। पर अविश्सनीय मुनाफा दर्शाता है। पांच साल में सारे रिकार्ड तोड़ जाता है। वो दिल्ली में करम का धनी है पर बिहार में किस्मत का। रेल में पास-बिहार में फेल। जातिवाद,अपहरण उद्योग, खून खराबा, निजी सेनाओं व नक्सलियों की समानांतर सरकार, अपराधियों की राजनीति, दागियों की सरकार व दल में बेशुमार, हर फाइल में घपले-घोटाले,लूट-खसोट, चौपट धंधे, रोते बंदे, इरादे गंदे, जनता हलाल-नातेदार, रिश्तेदार कंगाल से मालामाल और विकास की जगह विनाश का जंगलराज इसी तरज पर 15 साल लालू राज का बेसुरा साज बजा। हेमा के गाल की तरह सड़कें तो नहीं बनीं हां लोग सड़कें ढंूढनें में लंगड़े-लूले जरूर होते गए। कश्मीर के आतंकवाद से ज्यादा वहां 15 साल में खून बहा। वो मीडिया को कोसता गया। विरोधियों को दुत्कारता गया। उसका घमंड सबको नीचा दिखाता गया। बिहार का नाम बदनाम हुआ। बिहारी बदनाम हुआ। पर उसका सिक्का चलता रहा। वो किसी के काबू में नहीं रहा पर सबको काबू में करता गया। बिहार में ना सही तो दिल्ली और देश में सही। सब जानते हैं-वो राजनीति में अविश्वसनीय है। हर दम चाल चलता है। जो हाथ मिलाता है उसे ही हलाल कर जाता है। फिर भी वो कमाल कर जाता है। पर इस बार हर दिमाग में यही सवाल है कि आखिर रेल की तरह बिहार को ड्राइव करने की बजाय उसने ड्राई क्यों बनाया? यही सवाल इस बार चुनाव में उसका पीछा कर रहा है। यही नीचा दिखा रहा है। क्या होगा समय बताने वाला है? लेकिन फिलहाल तो यही कहना पड़ेगा कि सब्जी में आलू और राजनीति में लालू का कोई जोड़ नहीं।
लालू प्रसाद यादव
0-11 जून 1947 को गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में गरीब परिवार में जन्म। पिता-कुंदन राय, माता-मरचिया देवी। राबड़ी से 1 जून 1973 को शादी। दो बेटे, सात बेटियां। आपातकाल के दौरान परिवार नियोजन की ज्यादती के विरोध में परिवार इतना बढ़ाया। नीतीश व सुशील मोदी संग पटना विवि छात्र यूनियन चुनाव से राजनीति की शुरूआत। फुटबाल के शानदार खिलाड़ी। 70 में जयप्रकाश नारायण व कर्पूरी ठाकुर से प्रभावती ,77 में सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने जनता पार्टी की ओर से संसद का टिकट दिया। सबसे कम उम्र के सांसद। 80-89 तक दो बार विधायक। विपक्षी दल के नेता। 90-95 तक परिषद में। कांग्रेस की जगन्नाथ सरकार का पतन। 90 में शरद यादव की जिद ने सीएम बनवाया। आडवाणी का रथ रोका। गिरफ्तार। 97 तक खुद सीएम रहे। 95 में विधायक। 96 में 950 करोड़ के चारा घोटाले में फंसे। दर्जनों अन्य नेता और अनगिनत अफसरों, कर्मचारियों पर फंदा। 30 जुलाई 97 में 134 दिन तक गिरफ्तार। स्टेट गेस्ट हाऊस से सुप्रीम कोर्ट ने बेऊर जेल में ठेला। इससे पहले इस्तीफा। पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। जनता दल तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल बनाया। सबसे लंबे समय तक किसी पार्टी का अकेला मुखिया। 98 में फिर सांसद। 90-05 तक राजद का बिहार में जंगल राज। जातिगत राजनीति। पिछड़ों और मुसलमानों की राजनीति। विकास चौपट। अपराध चरम पर। समानांतर सरकार। अपहरण उद्योग की दहशत। कई दर्जन क्षेत्रीय सेनाओं का वर्चस्व। नक्सली आधिपत्य कायम। रोजाना खूनखराबा। सारे उद्योग धंधे चौपट। सब कंपनियों, डाक्टरों व पैसे वालों का बिहार से पलायन। जनता में त्राहिमाम। सूबे का नाम बदनाम। 2005 में राजग सरकार। नीतीश युग की शुरूआत। चारा घोटाले में पांच बार गिरफ्तार। आय से अधिक संपत्ति का भी केस। इसमें भी गिरफ्तार। सारे नातेदारों और रिश्तेदारों को गद्दियों पर बैठाया। जमीनों को हथियाया। 2004 में लालू समेत 26 राजद नेता सांसद बने। यूपीए सरकार में रेलमंत्री। रेलवे की कायापलट। गाय की तरह दूहा। घाटे की रेल माया से लबालब। इस बार दो जगह से चुनाव मैदान में। कांग्रेस को ठैंगा दिखाया। पासवान और मुलायम से दोस्ती।
0-11 जून 1947 को गोपालगंज जिले के फुलवरिया गांव में गरीब परिवार में जन्म। पिता-कुंदन राय, माता-मरचिया देवी। राबड़ी से 1 जून 1973 को शादी। दो बेटे, सात बेटियां। आपातकाल के दौरान परिवार नियोजन की ज्यादती के विरोध में परिवार इतना बढ़ाया। नीतीश व सुशील मोदी संग पटना विवि छात्र यूनियन चुनाव से राजनीति की शुरूआत। फुटबाल के शानदार खिलाड़ी। 70 में जयप्रकाश नारायण व कर्पूरी ठाकुर से प्रभावती ,77 में सत्येंद्र नारायण सिन्हा ने जनता पार्टी की ओर से संसद का टिकट दिया। सबसे कम उम्र के सांसद। 80-89 तक दो बार विधायक। विपक्षी दल के नेता। 90-95 तक परिषद में। कांग्रेस की जगन्नाथ सरकार का पतन। 90 में शरद यादव की जिद ने सीएम बनवाया। आडवाणी का रथ रोका। गिरफ्तार। 97 तक खुद सीएम रहे। 95 में विधायक। 96 में 950 करोड़ के चारा घोटाले में फंसे। दर्जनों अन्य नेता और अनगिनत अफसरों, कर्मचारियों पर फंदा। 30 जुलाई 97 में 134 दिन तक गिरफ्तार। स्टेट गेस्ट हाऊस से सुप्रीम कोर्ट ने बेऊर जेल में ठेला। इससे पहले इस्तीफा। पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बनाया। जनता दल तोड़कर राष्ट्रीय जनता दल बनाया। सबसे लंबे समय तक किसी पार्टी का अकेला मुखिया। 98 में फिर सांसद। 90-05 तक राजद का बिहार में जंगल राज। जातिगत राजनीति। पिछड़ों और मुसलमानों की राजनीति। विकास चौपट। अपराध चरम पर। समानांतर सरकार। अपहरण उद्योग की दहशत। कई दर्जन क्षेत्रीय सेनाओं का वर्चस्व। नक्सली आधिपत्य कायम। रोजाना खूनखराबा। सारे उद्योग धंधे चौपट। सब कंपनियों, डाक्टरों व पैसे वालों का बिहार से पलायन। जनता में त्राहिमाम। सूबे का नाम बदनाम। 2005 में राजग सरकार। नीतीश युग की शुरूआत। चारा घोटाले में पांच बार गिरफ्तार। आय से अधिक संपत्ति का भी केस। इसमें भी गिरफ्तार। सारे नातेदारों और रिश्तेदारों को गद्दियों पर बैठाया। जमीनों को हथियाया। 2004 में लालू समेत 26 राजद नेता सांसद बने। यूपीए सरकार में रेलमंत्री। रेलवे की कायापलट। गाय की तरह दूहा। घाटे की रेल माया से लबालब। इस बार दो जगह से चुनाव मैदान में। कांग्रेस को ठैंगा दिखाया। पासवान और मुलायम से दोस्ती।