गुरुवार, 18 जून 2009

स्टार का अनाचार

देशपाल सिंह पंवार
समाज के हर क्षेत्र में पतन हो रहा है। खासकर चारित्ररिक पतन। यह साफ-साफ दिखता है। इसके बावजूद किसी भी क्षेत्र का जब कोई जाना-पहचाना नाम किसी •भी मामले में फंसता है तो कहीं न कहीं दिल के कोने को कष्ट होता है। सिने जगत भी पतन की इस राह से अछूता नहीं है। कभी कोई स्टार माफिया डान से रिश्तों के कारण चक्कर काटता नजर आता है तो कभी कोई हत्या जैसे अपराध से जुड़ा नजर आता है। कभी स्टिंग आपरेशन में नैतिकता को धूल में मिलाता दिखाई देता है तो कभी अश्लील हरकतों से सबका सिर शर्म से झुका जाता है। गैंगस्टर, वो लम्हे जैसी फिल्मों के नायक शाइनी आहूजा ने इस सूची को और लंबा तथा सिने जगत को और बदनाम करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। नौकरानी के साथ रेप और मुंह खोलने पर मारने की धमकी देकर उन्होंने जता और दिखा दिया है कि परदे के ये नायक नकली तथा सामान्य इंसान हैं और मौका मिलने पर असली खलनायक होते हैं। नौकरानी की शिकायत पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने 18 जून तक हिरासत में भेज दिया है। शाइनी आहूजा ने तर्क दिया है कि सहमति के बाद ही उन्होंने संबंध बनाया। क्या यह तर्क गले उतर सकता है? वो शादी-शुदा हैं। अपने जीवन साथी को धोखा देना क्या नैतिकता है? अब समय आ गया है कि ऐसे चेहरों को सजा मिलनी ही चाहिए। महेश उनके कुकर्म से दुखी हैं और निंदा कर रहे हैं। पर अपने कारनामों से बदनाम हो चुकी इस फिल्म इंडस्ट्री को अगर बचाना और चलाना है तो ऐसे चेहरों को सबी निर्माताओं को अब दरकिनार करना चाहिए जिनके दामन पर दाग हैं। माना कि परदे पर रियल नहीं रील लाइफ होती है लेकिन जिन कहानियों का असर समाज पर होता हो और जो सिने स्टार पूजे जाते हों वो अगर ऐसे काम करेंगे तो एक दिन ये धंधा इतना गंदा हो जाएगा कि उन्हें ना कोई देखने वाला होगा और ना सराहने वाला। वैसे भी फिल्म इंडस्ट्री में शोषण की कहानियां रोज इतनी बन रही हैं कि अच्छे घरों की बेटियां इधर जाने से घबराती है। अगर सब घरों ने इनकी कहानियों को देखना बंद कर दिया तो सारे सड़क पर नजर आएंगे। जनता से सीधे जुड़े सब क्षेत्रों के बड़े नामों का हर कदम अगर चर्चा का विषय बनता है तो वो यह कहकर पीछा नहीं छुड़ा सकते कि यह उनकी व्यक्तिगत जिंदगी है। आदर्श चेहरों को और ज्यादा ध्यान रखना पड़ता है लेकिन फिल्मी दुनिया के ढेरों चेहरों को यह सब महज शब्द नजर आते हैं। जैसे ये स्टार हैं, ऐसी ही कहानियां परदे पर नजर आने लगी हैं। जितनी तेजी से आती हैं उतनी ही तेजी से बिसरा दी जाती हैं। इस मायानगरी को दुनिया में नाम दिलाने वालों की राह पर चलने वाले कम रह गए हैं। जो हैं भी उन्हें अब यह अलख जगानी चाहिए कि फिर कोई शाइनी आहूजा जैसा भोगी उनके बीच ना टिक पाए। फिलहाल तो यही कहा जा सकता है कि ग्लैमर और दौलत की चकाचौंध में सारी नैतिकता तार-तार हो चुकी है।

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