मंगलवार, 30 जून 2009

लालगढ़ का असली मर्ज


देशपाल सिंह पंवार

सुरक्षाबलों ने लालगढ़ खाली करा लिया है। सरकार ने ऐलान कर दिया है कि मिशन लालगढ़ पूरा हो गया है। माओवादियों की किलेबंदी ढह गई है। सब खुश हैं सरकार की ओर से ये जताया जा रहा है। दिखाया जा रहा है। सवाल यही उठता है कि क्या वास्तव में आपरेशन लालगढ़ पूरा हो गया है? किसी इलाके को खाली कराने मात्र से आपरेशन को पूरा मान लिया जाए? यह इलाका अब शांत रहेगा इसकी क्या गारंटी है? अगर गारंटी दी जा सकती है तो सवाल यह भी पैदा होता है कि क्या वास्तव में यहां माओवादियों का राज था? कहीं यह सारा आपरेशन उद्योगपतियों को जमीन दिलाने के वास्ते निहत्थे ग्रामीणों के खिलाफ तो नहीं था। जिस तरह बिना किसी खून खराबे के सुरक्षा बल हर रोज आगे बढ़ते रहे और माओवादियों के खिसकने की खबरें आती रहीं उससे तो यही लगता है कि परदे के पीछे की कहानी कुछ ऐसी ही है। हो सकता है ऐसा ना हो हां अगर वास्तव में ऐसा है तो फिर लोकतंत्र और जनतंत्र के लिए इससे ज्यादा दुखदायी और शर्मनाक अध्याय कोई दूसरा नहीं हो सकता। ऐसे में सारे देश को अंधेरे में रखने के गुनाह से बंगाल सरकार नहीं बच सकती। केंद्र सरकार को इसकी गहराई से जांच करानी चाहिए। सुरक्षा बलों को लीड कर रहे अफसरों और जवानों से बेहतर इस बारे में कोई नहीं बता सकता कि आखिर कड़वा सच क्या है? सिंगूर प्रकरण की हार से तिलमिलाई बंगाल सरकार ने अगर आसानी से जमीन दिलाने के वास्ते ये सारा खेल खेला तो फिर सिंगुर जनआंदोलन को सही और लालगढ़ आंदोलन को गलत कैसे ठहराया जा सकता है? जांच से ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा। आपरेशन पूरा होने के बाद अगर यहां शांति की गारंटी नहीं दी जा सकती तो फिर कैसे मान लिया जाए कि आपरेशन पूरा हो गया है? हकीकत यही है कि इलाका खाली हुआ है। शांत नहीं। शांति तब होगी जब सरकार उस तह तक पहुंच जाएगी जिसकी वजह से ऐसे देश विरोधी हालात बने। उन समस्याओं का निदान भी होगा, विकास भी करना होगा,साथ ही यह अहसास भी कराना होगा कि सरकार आपकी है। आपके साथ है। देश आपका है। आपके हाथ ही उसे मजबूत करेंगे। जल,जंगल और जमीन को खोने वाली कौम के सामने जब जान के लाले पड़ जाते हैं तो वहीं से अविश्वास का पेड़ उग आता है। ये हालात बन आते हैं। जिस दिन सरकार इन लोगों के साथ खड़ी नजर आएगी तो ये माओवादियों की बजाय जनता नजर आएगी। जनता को भी चाहिए कि वो लोकतंत्र में मिले अधिकारों के प्रति जागरूक हो, ना कि बरगलाने और खून खराबा कराने वाली देश और विकास विरोधी ताकतों के पीछे खड़ी नजर आए। किसी भी समस्या का समाधान कभी हथियारों से नहीं हुआ। लालगढ़ या ऐसे ही किसी दूसरे गढ़ में भी नहीं हो सकता। केंद्र सरकार का आपरेशन तभी पूरा होगा जब वो मर्ज को जड़ से खत्म करेगी। वरना ऐसे तमाम लालगढ़ या तो पैदा हो गए हैं या तैयारी कर रहे हैं। प्रतिबंध जैसे कदमों से कुछ नहीं होता क्योंकि पाबंदी का असर उन पर होता है जो सरकार के अधीन हों। सरकार को उन कारकों को रोकना होगा जो लालगढ़ बना रहे हैं।