गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

कडवी जुबान




देशपाल सिंह पंवार
किस्मत के खेल निराले- वो भी उसी खानदान का चिराग है जिसके बिना देश की राजनीति की दास्तान पूरी नहीं हो सकती। इसी खानदान के दूसरे चिराग को युवराज कहा जाता है। अगला प्रधानमंत्री माना जाता है। नरम और दूरदर्शी सोच का युवा नेता पुकारा जाता है। दूसरी ओर इस युवक की गरम मिजाजी चर्चा में रहती है। बयानबाजी हंगामा कराती रहती है। चाल माहौल को लाल बनाती रहती है। जो दिल में वही जुबान पर। वो राजनेताओं के कहने पर कुछ बोल सकता है लेकिन अपनी तरफ से राजनीति नहीं कर सकता। जिस उम्र में पढ़ाई-लिखाई या शादी-विवाह की बात होती है उस उम्र में वो अपने जहरीले बोल से दुनिया में सर्वाधिक चर्चा में है। वो चाहे अब तक सांसद ना बना हो पर तमाम तजुर्बेकार सांसदों से ज्यादा लोकप्रिय है। कट्टर हिंदू उस पर जान छिड़कते हैं। कट्टर मुसलमान उसकी जान जाने की दुआ करते हैं। वो कहीं नायक है तो कहीं खलनायक। वो देश प्रेम की बात करता है लेकिन ढेरों लोगों की नजर में उसकी बात देश को तोड़ने वाली है। वो हिंदुओं की एकजुटता की बात करता है लेकिन साथ ही ये भूल जाता है कि ये सर्व धर्म की नीति पर चलने वाला देश है। ऐसा नहीं है कि उसकी जुबान चुनाव के दौरान ही कड़वी होती है। बचपन में जब मां ने दादी का घर छोड़ा तो इस बच्चे ने अपनी मां को दोषी ठहराया। जब वो युवावस्था में पहुंचा तो अपने कजिन और अपनी ताई सोनिया गांधी पर जमकर तीर चलाए। उसे भी सोनिया विदेशी नजर आती थी। उसने न नरेंद्र मोदी को बख्शा और न ही महात्मा गांधी को। देश का नक्शा पलटने की कोई सोच या योजना चाहे उसके पास नहीं थी लेकिन देश का बेड़ा गर्क कैसे और कौन लोग करते रहे इस पर वो घंटों बोल सकता था या बोल सकता है। लोकतंत्र में उसकी यही बातें जहर मानी जाती हैं। यह भी नहीं भूलना चाहिए कि वो संजय गांधी का बेटा है। वो संजय गांधी जिसमें एक समय देश की तकदीर बदलने वाले आगामी चेहरे की झलक लोगों को दिखती थी। वो भी जुबान के कड़वे थे। उनकी भी चाल तेज थी वो जो चाहते थे करने का माद्दा रखते थे। बचपन में पिता की मौत और लगातार महत्वाकांक्षी मां के साए में पलने वाले युवक की जुबान में मिठास कैसे हो सकता है? हां हर जुल्म-ज्यादती का बदला लेने की आग जरूर होती है। यही इस युवा नेता की चाल-ढाल और हाल से नजर भी आता है। कितनी अजीब विडम्बना है कि गांधी खानदान का चिराग दुश्मन के कैंप में जलता नजर आता है। इसका मलाल सोनिया गांधी या राहुल गांधी को चाहे कितना भी हो लेकिन न तो इस युवा नेता को है और न ही मेनका गांधी को। मां को तो शायद इसी दिन का इंतजार था जब उसका बेटा उसकी सारी इच्छाएं और प्रतिज्ञाएं पूरी करेगा। अब वो समय सामने है। चाहे आप उसे कोसें या प्यार करें पर आज वो सबसे बड़ा हिंदुवादी चेहरा है। उसे चाहे लोग युवराज ना कहें पर युवराज का खेल खराब करने का माद्दा उसमें है। रासुका में जेल जाने का तजुर्बा उसे और मजबूत करेगा। इस चेहरे की बदौलत वो लंबी पारी खेलेगा यह तय है। बीजेपी खुश है उसके पास वे कंधे हैं जिन पर रखकर वो 10 जनपथ पर तीर चला सकती है। देखना है इस बार क्या नतीजे रहते हैं? उसके पिता ने दुनिया को मारूति दी वो क्या देता है यह सबसे बड़ा सवाल है?
वरुण फिरोज गांधी
0-13 मार्च 1980 को नई दिल्ली में जन्म। पिता संजय गांधी, माता मेनका गांधी। तीन माह की उम्र में पिता की विमान हादसे में मौत। 4 साल की उम्र में दादी श्रीमती इंदिरा गांधी की हत्या। मां मेनका गांधी शुरू से ही महत्वाकांक्षी। कांग्रेस का लगातार विरोध। दादी का घर छोड़ने के मां के फैसले का विरोध। मां का पशु-पक्षियों से ज्यादा लगाव। इनके लिए काम करने वाली सशक्त महिला। आंध्र प्रदेश के रिषि वैली स्कूल में पढ़ाई। लंदन विवि से डिग्री। शुरुआत से राजनीतिक माहौल। 99 अगस्त में राजनीतिक कैरियर की शुरुआत। पिल्लिभित्त में मां के लिए चुनाव प्रचार की बागडोर ,ओजस्वी भास्न्न इसी दौरान एक किताब लिखी। मेनका गांधी और प्रमोद महाजन के कहने पर 2004 में विधिवत रूप से बीजेपी ज्वाइन। सोनिया गांधी इस फैसले से दुखी। फिर भी सफलता की बधाई दी। बीजेपी ने 04 में स्टार प्रचारक की तरह उन्हें इस्तेमाल किया। लगातार कांग्रेस और सोनिया गांधी पर तीखे प्रहार। इसी साल बीजेपी कार्यसमिति में शामिल। शिवराज सिंह चौहान की खाली विदिशा सीट से 06 में चुनाव लड़ने की पेशकश। फिर मिर्जापुर से उपचुनाव लड़ने की पेशकश। दोनों बार इंकार। इस बार पांच बार पीलीभीत से सांसद रहीं मेनका ने बेटे के लिए सीट छोड़ी। खुद आंवला से चुनाव मैदान में। बीजेपी का फिर स्टार प्रचारक। 6 मार्च 09 को रैली में अल्पसंख्यकों के लिए जहर उगला। माहौल तनावपूर्ण होने से मायावती ने रासुका थोपी। जेल में डाला गया। मामला और गरमाया। बीजेपी ने मुद्दा बनाया। हर दल ने माया को गरियाया। सुप्रीम कोर्ट में फिर कड़वा बयान न देने का हलफनामा। दो हफ्ते के लिए रिहा। परचा भरा ,सारी दुनिया की नजर इस सीट पर। अब बीजेपी का सबसे आकर्षक हिंदुवादी चेहरा। पूरी पार्टी पीछे।

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