गुरुवार, 30 अप्रैल 2009

अम्मा की शान निराली



देशपाल सिंह पंवार
बचपन की ओर पहला कदम भी नहीं रखा था कि पिता का साया हमेशा के लिए सिर से उठ गया। जवानी की ओर कदम भी नहीं रखा था कि पढ़ाई-लिखाई में होशियार होने के बावजूद कालेज से नाता टूट गया। राजनीति में ढंग से पहला कदम बढ़ाया नहीं था कि राजनीतिक गुरू और दिल के बेहद करीबी एमजीआर हमेशा के लिए छोड़कर चले गए। पार्टी में ग्रिप की ओर पहला कदम भी नहीं बढ़ाया था कि एमजीआर की विधवा के साथ ठन गई। संसदीय माहौल की तरफ पहला कदम ढंग से रखा नहीं था कि अनेक अनचाहे दुश्मन खड़े हो गए। विधानसभा में विपक्ष की नेता के रूप में पहला कदम रखा ही था कि द्रमुक नेताओं के तानों से ऑंखें भर आई। तौहीन इतनी दिल को छू गई कि फिर सदन में नेता के रूप में ही वापस आई। देश की राजनीति में रमने की ओर कदम बढ़ाया था तो अटल सरकार गिराने का टींकरा सिर फूट गया। सीएम के रूप में पारी की ओर कदम बढ़ाया ही था कि बेईमानी के अनगिनत आरोप दामन पर लगने लगे। साड़ियां, सोना-चांदी, हीरे-जवाहारात और चप्पल-जूतियों के शौक मीडिया में जोक बनने लगे। मंत्री भी पीछे नहीं रहे। सबने दोनों हाथों से दौलत कमाई। राज्य में जल्दी ही फिर ऐसे हालात बने कि परपंरागत दुश्मन करूणानिधि फिर सत्ता में आ गए। उन्होंने गद्दी पर बैठते ही सारी फाइलों को खंगालना शुरू कर दिया। नतीजा दर्जनों मामले चारों ओर मंडराने लगे। तमिलनाडु की राजनीति दो ही दलों के इर्द-गिर्द घूमती है। एक से जनता बोर तो फिर दूसरे दल का जोर। फिर दूसरी बार सत्ता की ओर कदम बढ़ाया तो पांच साल के प्रहार ने व्यवहार बदल कर रख दिया। संत हो या संपादक, नेता हो या कलाकार सबको जेल की हवा खिलाई। वे सबकी अम्मा कहलाने लगी थीं पर उनके तेवर और कामकाज से न कल अम्मा का रूप झलकता था और न ही आज। वे एकता कपूर के सीरियल की किरदार अम्मा जैसी बार-बार नजर आतीं रहीं। ऐसी अम्मा जो गलतियों पर किसी भी हद तक सजा देने से ना हिचकिचाए। ऐसी अम्मा जो अपने राजपाट को बचाने या बनाने के लिए किसी भी हद तक पद और पावर का इस्तेमाल करने में न हिचकिचाए। ऐसी अम्मा जिसका बचपन चाहे गरीबी में बीता हो पर जवानी और उसके बाद का दौर जिसका शानो शौकत में बिताया। ग्लैमर से लेकर धन दौलत तक ऊपर वाले ने खूब उन्हें दिया। हां इस पर किसी को बोलने या लिखने का अधिकार अम्मा ने किसी को नहीं दिया। बचपन और जवानी में डांस की माहिर अम्मा अब सबको अपने आगे-पीछे खूब नचाती है। खासकर विरोधी द्रमुक नेताओं को या फिर उन्हें जो उनके सहारे अपनी नैया पार करने की सोचते हैं। उनका सपना देश की अम्मा बनने का है। इसके लिए वे नए-नए गठजोड़ करने में पीछे नहीं हटतीं। बशर्ते हाथ मिलाने की बजाय दूसरा हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर उन्हें अम्मा कहे। अम्मा चालाक राजनेता से ज्यादा एक जिद्दी राजनेता मानी जाती हैं। इस बार वे इस स्थिति में आ सकती हैं कि अगली सरकार में उनकी तूती बोले। अगर ऐसा हुआ तो यकीनन अम्मा का असली रूप तब देखने को मिलेगा। अम्मा से ज्यादा एक महारानी का रूप-जिसे ना सुनना पसंद नहीं।
जयललिता जयराम

0-24 फरवरी,1948 को मैसूर में जन्म। दो साल की उम्र में पिता का निधन। परिवार बेहद गरीब। बैंगलूर के बिशप स्कूल से हाईस्कूल। मां संध्या के साथ फिर मद्रास शिफ्ट। मां तमिल फिल्मों की अदाकारा। केंद्र सरकार की ओर से उच्च शिक्षा के लिए स्कालरशिप। मां की सलाह पर फिल्मों में प्रवेश। 61 में वीवी गिरि के बेटे की अंग्रेजी फिल्म एपिस्टल से शुरूआत। तमिल फिल्मों की सुपरस्टार। 72 में फिल्म इज्जत में धर्मेंद्र की हीरोइन। 1981 में अन्नाद्रमुक ज्वाइन। राजनीति की शुरूआत। 88 में उच्चसदन में । एमजी रामचंद्रन से बेहद नजदीकी रिश्ते। एजीआर की मौत के बाद पार्टी में अलग-थलग। खलनायिका की छवि। 89 में विधानसभा चुनाव जीतीं। विरोधी दल की पहली महिला नेता। द्रमुक पर सदन में तौहीन के आरोप। राजीव गांधी की हत्या के बाद कांग्रेस से गठजोड़। अन्नाद्रमुक पर काबिज। चुनाव में फतह। 91 में पहली चुनी हुई महिला मुख्यमंत्री। सर्वाधिक विवादास्पद नेताओं में से एक। 92 में महिला आईएएस चंद्रलेखा पर सरेआम चेन्नई की सड़क पर तेजाब फैंका गया। जयललिता के इशारे पर कांड। 95 में एक वकील पर कातिलाना हमला। दर्जनों करप्शन के मामले। 96 में द्रमुक के हाथों हार। ज्यादातर मंत्रियो की हार। केंद्र में अटल की सरकार गिराने के लिए जिम्मेदार। 2001 में फिर सत्ता में। तांसी मामले में पांच साल की सजा। सीएम बनने पर बवाल। गद्दी छोड़नी पड़ी। सुप्रीम कोर्ट से सबूत के बिना राहत। 03 में शिक्षकों की हड़ताल। 1,70 हजार शिक्षक बर्खास्त। 04 में फिर बहाल। स्वामी जयेंद्र सरस्वती को गिरफ्तार कराया। एम करूणानिधि, मुरासोली मारन और टीआर बालू को गिरफ्तार कराया। हिंदू अखबार के संपादक को 15 दिन तक जेल में रखा। जिद्दी महिला। 2006 में फिर सत्ता से बाहर। विपक्षी नेता पद पर बवाल। पार्टी पर शिकंजा कमजोर। किसी तरह फिर जया उस गद्दी पर। ज्योतिष पर विश्वास। कई विवि की ओर से डीलिट की विवादास्पद उपाधि। देश पर राज करने का सपना। द्रमुक की घनघोर विरोधी।

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