शनिवार, 27 जून 2009

युवराज का राज



देशपाल सिंह पंवार
टीम इंडिया फिर क्रिकेट के मैदान में है। वेस्टइंडीज के खिलाफ उसी धरती पर चार वन डे मैच खेलेगी। युवराज और नेहरा की वजह से पहला वनडे जीत चुकी है। कोई दौरा हो और क्रिकेट प्रेमी उसके लिए उत्साहित ना हों ऐसा अमूमन कभी इंडियन क्रिकेट में हुआ नहीं है। लेकिन इस बार ऐसा ही है। लुटी-पिटी धोनी की टीम में चाहे नकली जोश हो, लेकिन क्रिकेट प्रेमियों में ना इस दौरे की कोई चर्चा है और ना ही टीम से बहुत ज्यादा उम्मीदें। युवराज छक्के जड़ें या धोनी शतक लगाएं या फिर सरदार विकेट की झड़ी लगाएं, क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में वाह-वाह की फीलिंग हिलौरे नहीं लेने वाली। इसमें हैरत की भी कोई बात नहीं है। टी-20 में सेमीफाइनल से पहले ही जिस तरह टीम इंडिया ने घुटने टेके उस वजह से क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में नाउम्मीदी या निराशा इस कदर ला दी है कि वे अब इस टीम से बहुत ज्यादा आस नहीं कर रहे हैं। ये सारे खिलाड़ी अब कागजी शेर ही नजर आते हैं। वेस्टइंडीज दौरे पर टीम इंडिया की जीत भी उस निराशा को दूर नहीं कर सकती। हां हार इस निराशा को और बढ़ा जरूर सकती है। इंडियन क्रिकेट और कंपनियों के लिए यह निराशा आने वाले समय में घातक साबित हो सकती है। अगर टीम इंडिया टी-20 में फिर खिताब जीत जाती या फाइट करने के बाद हारती तो इस दौरे का महत्व काफी ज्यादा होता। साथ ही इस दौरे के प्रति इसलिए भी दर्शकों में ज्यादा जोश नहीं है क्योंकि सचिन, सहवाग और जहीर जैसे खिलाड़ी इस टूर पर नहीं हैं। सचिन की उम्र भले ही ढल गई हो लेकिन आज भी सब उसे खेलते देखना चाहते हैं। ऐसे में खुद सचिन और इंडियन बोर्ड को चाहिए कि वे क्रिकेट की सभी फोरम में फिट रहने पर सचिन को जरूर टीम में रखें और सचिन उनमें फिर पुरानी रंगत दिखाएं। इस स्टार की गैरमौजूदगी नकारात्मक असर छोड़ती है इस बात को क्रिकेट चलाने वालों को मान लेना चाहिए। वैसे भी वेस्टइंडीज दौरे के मैच देर रात खत्म होते हैं तब भी दर्शक टी वी से चिपके रहते पर इस बार इसके आसार ना के बराबर हैं। कम से कम इस समय इन क्रिकेटरों का खेल (?) देखने के लिए कोई अपनी नींद खराब नहीं करना चाहता। सीरिज प्रायोजित करने वाली कंपनियों को इसका डर सता भी रहा है। इस सीरिज का महत्व बस इतना सा ही माना जा रहा है कि धोनी इलेविन लगे दाग को थोड़ा साफ करने में कामयाब हो। सवाल यही उठता है कि क्या होगा? धोनी के अलावा युवराज, सरदार जैसे खिलाड़ी ही वेस्टइंडीज के विकटों पर खेले हैं बाकी ज्यादातर क्रिकेटर वहां की पिचों से वाकिफ नहीं हैं। वेस्टइंडीज के कप्तान गेल अगर ये मानते हैं कि इंडिया को हराना कदापि आसान नहीं होता तो यह भी कटु सत्य है कि वेस्टइंडीज की टीम कितनी भी कमजोर हो, घरेलू मैदानों पर उन्हें मात देना हर टीम के लिए मुश्किल होता है। आफ स्पिनर का रोल महत्वपूर्ण होगा, ऐसे में सरदार पर करिश्मे का सबसे बड़ा दारोमदार होगा। धोनी को रन बनाने ही होंगे वरना हर कोई यह मान चुका है कि वो बल्ला चलाना भूल चुका है। अगर चारों मैच इंडिया जीतता है तो शायद इस फार्मेट में कुछ इज्जत बची रहे। ऐसा आसान नहीं। यह तय है। हां युवराज ऐसी फार्म में हैं कि इस समय किसी गेंदबाज को धो सकते हैं। वही प्रेमियों को इस निराशा से उबार सकते हैं।

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