रविवार, 10 मई 2009

सीताराम-दूसरे की नींद हराम



देशपाल सिंह पंवार
देश की राजनीति में ऐसे बिरले ही होंगे जो हर विषय पर पकड़ रखते हों। वो घंटों धारा प्रवाह बोल सकता है। तर्क कर सकता है। सामने वाले को मजबूर कर सकता है। उसने जिंदगी से, कालेज से, किताबों से, आंदोलन से, घूमने से, पार्टी से, नेतागिरी से जो ज्ञान अर्जित किया उसके सहारे, बिना तैयारी के वो हर मसले पर बोल सकता है। हां सामने वाला पूरी तैयारी के बाद ही उससे टक्कर ले सकता है। पर उसे तर्को से डिगाना आसान नहीं। उसे उसकी सोच से हटाना आसान नहीं। उसे अर्थशास्त्र से लगाव था पर राजनीति से जुड़ाव है। उसने जब तक किताबी पढ़ाई की हर क्लास में टापर रहा। पर पार्टी में वह टापर तो नहीं हां टाप फाइव में जरूर है। उसने 22 साल की उम्र में लाल झंडा उठा लिया था। तब से आज तक इसके सहारे सारी दुनिया घूम चुका है। वो फिदेल कास्त्रों का फैन है। जब •भी मौका मिलता है नहीं चूकता। वैसे चूकने की उसे आदत भी नहीं है। उसे मौके भी मिलते हैं और वो मौके तलाश भी लेता है। दनादन वार करना उसकी आदत में शामिल है। पावर के साथ रहकर पावर पर ही वार का अनोखा खेल वही खेल सकता है। देख लीजिए 21 वीं सदी में मीडिया में उससे ज्यादा स्थान शायद देश के प्रधानमंत्री को भी नहीं मिला होगा। जबकि वो सिर्फ एक सांसद है। वो भी उच्चसदन में। वह किताबी ज्ञान के दौर में चाहे चुनाव लड़ा हो पर उसके बाद कभी नहीं। बिना चुनाव लड़े •भी देश की राजनीति और मीडिया पर छाया जा सकता है कोई इस नेता से सीखे। कारण-वो लाल झंडाबरदार है, अच्छा लेखक है,अच्छा विचारक है, अच्छा वक्ता है और उससे •भी बढ़कर आसानी से उपलब्ध रहने वाला वो नेता है जिसके बोल का मोल है। फिर मीडिया से उसके गहरे रिश्ते हैं। वो खुद पार्टी के मुखपत्र का संपादक है साथ ही प्रसिद्ध पत्रकार का पति। क्या बात खबर बनेगी, हल्ला मचायेगी यह उसको अच्छी तरह पता है। दिल्ली में जब भी शांति से सरकार चल रही हो वो चाहे नजर ना आए पर राजनीति का पारा जैसे ही गरम होगा वहां हाथ तापने वाले चेहरों में सबसे आगे वही दिखाई देगा। अपनी तरफ से पहल करेगा। आग में घी डालने का काम करेगा । पहले खराब करो-फिर ठीक करो तथा क्रेडिट लो इस नीति पर वो अमूमन कामयाब रहता है। 2004 में जिस तरह यूपीए सरकार बनाने, चलाने, कमाई खाने और हटाने में उसने रोल अदा किया था इस बार उससे बड़ा रोल वो अदा करेगा यह तय है। खंडित जनादेश सिर पर है। ऐसी स्थिति में ऐसे ही चेहरे कामयाब होते हैं जो गठजोड़ में उस्ताद हों। वो जानता है कब, कहां और कैसे किस पर हाथ रखना है, मनाना है,अपना असर बढ़ाना है। सब जीत की चिंता में डूबे हैं और वो कांग्रेस व बीजेपी का खेल खराब करने की मुहिम में जुटा है। राजनीति की यही माया है -एक गिरता है तो दूसरा मजबूत होता है। एक रोता है तो दूसरा हंसता है। उसके पास खोने को कुछ नहीं। लिहाजा वो हंसने वालों की जमात में से है। जो हंसिया लेकर काटता है और समय पर हथौड़ा चलाता है। इसे लोकतंत्र विडंबना ही कहा जाएगा कि 30-40 सीट पाने वाले सरकार या तो बनवाते हैं या सरकार गिरवाते हैं। फिर वो तो इस विधा का मास्टर है। अगर वो नेपाल में माओवादियों की सरकार बनवा सकता है तो फिर दिल्ली में लाल झंडा कैसे नीचा रह सकता है? वो भी उसके रहते। वो भी सत्ता सुख का खून मुंह लगने के बाद, ऐसा कैसे हो सकता है? तो तैयार रहिए और देखिए सत्ता की लड़ाई-गठजोड़ की कमाई-लोकतंत्र की दुहाई। फिल्म अच्छी लगे तो जरूर बोलिए-जय सीताराम।
सीताराम येचुरी

0- हैदराबाद के पास कलपक्कम में 12 अगस्त,1952 को जन्म। काकीनाड से परिवार यहां शिफ्ट हुआ था। हैदराबाद के सेंट हाईस्कूल से शुरूआती शिक्षा। 70 में हायर सेकेंडरी परीक्षा में देश में सर्वोच्च स्थान। तेलंगाना आंदोलन के कारण राज्य में अशांति। आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली में। 73 में सेंट स्टीफन्स से प्रथम श्रेणी में अर्थशास्त्र में बीए आनर्स। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से फिर प्रथम श्रेणी में अर्थशास्त्र में एमए। 74 में स्टूÞडेंट फेडरेशन आफ इंडिया के सदस्य। एक साल बाद माकपा ज्वाइन। आपातकाल में धरपकड़। कुछ समय अंडरग्राउंड रहने के बाद गिरफ्तार। पीएचडी पूरी नहीं कर सके। आपातकाल के बाद जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष। जेएनयू में लाल झंडा फहराने वाला और हास्टल पर वाम विचार धारा का कब्जा कराने वाला पहला शख्स। 77-78 में एक साल में तीन बार इस यूनियन के अध्यक्ष रहे। एक रिकार्ड़। 78 में एसएफआई के संयुक्त सचिव। फिर अध्यक्ष। 86 में इस्तीफा। माकपा की केंद्रीय समिति में। 85 में फिर निर्वाचित। 88 में केंद्रीय सचिवालय समिति में निर्वाचित। 92 से अब तक पोलित ब्यूरो के सदस्य। 2005 में उच्च सदन के लिए निर्वाचित। वाम विचारधारा का देश में बड़े लेखकों में से एक। तमाम विषयों का जानकार। तमाम अखबारों में नियमित कालम। कई किताबें लिखी। विवादित ढांचा गिरने के बाद लिखी गई किताब सैफरन ब्रिगेड सर्वाधिक चर्चित। हर समय घूमने की रिकार्डÞ। फिदेल कास्त्रो से कई दफा मुलाकात करने वाले कुछ वामनेताओं में से एक। पार्टी की ओर से तमाम इंटरनेशनल समारोह में शामिल। नेपाल में माओवादियों को लोकतंत्र की ओर लाने तथा सरकार बनाने में महत्वपूर्ण रोल। परमाणु करार पर सरकार के खिलाफ झंडा बुलंद करने वालों में से एक। पत्रकार सीमा चिश्ती से दूसरी शादी। पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी। इस समय पार्टी के इंटरनेशनल विंग के अध्यक्ष और मुखपत्र के संपादक। इस बार सरकार बनाने में फिर महत्वपूर्ण रोल अदा करेंगे।

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