
देशपाल सिंह पंवार
वो 80 के दशक में कुछ नहीं था पर जुगाड़ से आज बहुत कुछ है। पैसे से भी -पावर से भी-पब्लिसिटी से •भी उसके आसपास कम ही चेहरे ठहर पाते हैं। वो यहां कैसे पहुंचा-ढेरों किस्से-कहानियां हैं। झूठ कम-सच ज्यादा। यह जरूर सच है कि बड़े नेताओं की संगत से चाहे उसने कम सीखा हो पर उनका खास होने का एहसास दूसरों को हमेशा कराया। ढेरों काम कराए। नेताओं के नाम पर काम कराते-कराते वो जल्दी ही असली नेतागिरी के सारे हुनर सीख गया। तालों के शहर का ये वाशिंदा किस्मत के ताले खोलने का माहिर हो गया। असली नेता बन गया। नेताजी की संगत में रम गया। राजनीति के मैदान में जम गया। अब उसे किसी नेता और उद्योगपति की गरज नहीं रहती,उन सबको उसकी जरूरत जरूर पड़ती है खासकर संकट के समय या फिर एक के ग्यारह बनवाने के वक्त। वो कभी चुनाव नहीं लड़ा पर 13 साल से सांसद है। उसे सब हल्के में लेते हैं पर सारे नामुमकिन काम करने और कराने में माहिर है। सरकार बचानी हो या बनानी जहां सब आस छोड़ देते हैं वहां वो जुगाड़ से पास होकर दिखाता है। हां शर्त सिर्फ इतनी रहती है कि तरीका अगर पसंद नहीं तो आंख बंद कर लीजिए। ढेरों ऐसे उदाहरण हैं जहां उसने अपनी जुगाड़ से मीडिया और औद्योगिक घरानों को कभी बचाया। बिग बी को भी बनाया। जिसके जुगाड़ साथ-उसके संग जगन्नाथ।उसे सत्ता के गलियारों में न जानें किन-किन नामों से पुकारा जाता है लेकिन उसे किसी की परवाह नहीं । हर कहीं उसे राजनीति का माहौल बिगाड़ने वालों में माना जाता है, ताना मारा जाता है, गाना गाया जाता है, पर उसका अपना ही जुगाड़ू राग लगातार बजता चला आ रहा है। जिसे ना चाहकर भी सुनना पड़ता है, झेलना पड़ता है। कोई भी मसला हो, कोई भी नेता हो मीडिया को अगर कोई नहीं मिलता तो वो हाजिर है। कमेंट इतने अच्छे कि कानों की थकावट दूर हो जाती है लेकिन गुनने बैठो तो कुछ हाथ पल्ले नहीं लगता। 04 में जब यूपीए की सरकार बन रही थी तो वो इस तरह दौड़ कर रहा था जैसे उसे ही पीएम बनना है लेकिन सोनिया ने जब तवज्जो नहीं दी तो इस असली नेता के वार की बानगी देखिए-मैं बनूंगी रानी-सब भरेंगे पानी। पिछले साल सरकार बचाते वक्त वो इसी रोल में नजर आ रहे थे। वैसे ऐसे हैडिंग लगाने की आर्ट सीखने में मीडिया जगत के लोगों को बरसों लग जाते हैं लेकिन उसके दिमाग में इनका खजाना है। उसके पास खूब जानकारी रहती है। नहीं होती तो बना लेता है। सब नेताओं के साथ उसके रिश्ते बेहतर हैं। यह समझ में नहीं आता कि आखिर हीरोइनों में इतने पापुलर शख्स से राजनीति की महिला हस्तियां क्यों खार खाए रहती हैं? ममता हो या माया, जयललिता हो या सोनिया हर कोई मुंह ही फुलाए क्यों रहती हैं? वो क्लिंटन को यूपी बुला सकता है, अमरीका से दौलत मंगा सकता है, सरकार बचा सकता है। बना सकता है। यानि सब कुछ कर सकता है तो फिर लाख टके का सवाल यही है कि वो उस ख्वाब को क्यों नहीं पूरा कर पा रहा है जो वो नेताजी को 15 साल से दिखाता आ रहा है,मायानगरी में घुमाता आ रहा है। यानि पीएम बनने का। यहां आकर उसका जुगाड़ फेल क्यों हो जाता है ? जुगाड़ से देश में हर काम किया जा सकता है-यात्री ढोने का,पानी निकालने का, सरकार चलाने का। विश्वास करिए-देखते रहिए: इस बार भी ये सबसे बड़ा जुगाड़ी कोई ना कोई गुल जरूर खिलाएगा।
अमर सिंह
0-उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ शहर में 27 जनवरी,1956 को राजपूत परिवार में जन्म। पिता स्वर्गीय हरीशचंद्र सिंह और माता शैलकुमारी सिंह। 14 जून 87 को पंकजाकुमारी सिंह से शादी। दो पुत्रियां। शिक्षा-बीए, एलएलबी सेंट जेवियर कालेज और यूनिवर्सिटी कालेज आफ ला कोलकाता से। पेशे से उद्योगपति। देवगौड़ा के समय में कर्नाटक में बिजली सयंत्र। इंडियन एयरलाइंस, स्टेट बैंक, एनटीसी के निदेशक रहे। राजनीति कांग्रेस से ही शुरू की। माधवराव सिंधिया के करीबी रहे। कोलकाता में जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव। बाद में कांग्रेस कार्यसमिति के सदस्य। समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्य। संयुक्त मोर्चा की संचालन समिति के सदस्य रहे। तमाम सरकारी और गैर सरकारी कमेटियों के सदस्य। सहारा ग्रुप और हिंदुस्तान टाइम्स के भी निदेशक रहे। फिल्मी दुनिया से गहरा नाता। बिग बी,सुब्रतो राय,अनिल अंबानी गहरे दोस्तों में। संगीत, किताब और फिल्मों के शौकीन। यूपी में मुलायम के राज में सबसे पावरफुल। हर मसले के अंतिम निर्णायक। नोएडा और देश के दूसरे हिस्सों में संपत्ति बनाने के आरोप। विदेशों खासकर अमरीका से धन लेने के आरोप। 96 से अब तक लगातार उच्चसदन में। दर्जनों संसदीय समितियों के सदस्य। कई के चेयरमैन। विवादों से गहरा नाता। ममता ने संसद में कालर पकड़ा। रोजाना मीडिया की सुर्खियों में। हर समय विवादित और खुलकर बोलने की आदत। 04 में यूपीए सरकार के गठन के दौरान सपा भी यूपीए के साथ। सोनिया के खिलाफ जहर उगला। 08 में परमाणु अप्रसार मसले पर ऐन वक्त में यूपीए की सरकार बचाने वाले प्रमुख रणनीतिकार। संसद में घूस के नोट उछले। नाम आया। मामला ठंडा। मुलायम से बेहद प्यार-मायावती पर लगातार वार। हर मुश्किल काम को पैसे, पावर और तिकड़म से कराने में माहिर।
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