रविवार, 29 मार्च 2009

आकाश पास

देशपाल सिंह पंवार
बेंगलूर में आजकल दो सेनाएं गरज रही हैं। एक जबरन खड़ी हो गयी है। लोकतंत्र में जनता की आजादी छीन रही है। धर्म के नाम पर तालिबानी बीन बजा रही है। आए दिन की धमकियों और गुंडागर्दी से अमन चैन लील रही है। प्यार करने वाली युवा पीढ़ी पर गरज रही है। दूसरी सेना देश के आकाश की रखवाली करती आ रही है। देश की जनता की रक्षा के लिए दुश्मन देशों में दहशत पैदा करती आ रही है। सब जानते हैं यही है असली सेना। इसी सेना को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए 126 लड़ाकू विमान खरीदने हैं, तकरीबन 43 हजार करोड़ का सौदा होना है। इसी सौदे को हासिल करने की होड़ के चलते यहां का आकाश कंपनियों की जंग का अखाड़ा बन गया है। आधुनिक लड़ाकू विमानों की गूंज से गरज रहा है। पुरातन काल यानि राजे-रजवाड़ों के दौर की तरह विमानों का स्वयंर हो रहा है। दुनिया की नामीगिरामी 589 कंपनियां एशिया की इस सबसे बड़ी रक्षा प्रदर्शनी में अपनी ताकत दिखाने पर आमादा हैं। वैसे तो एयरो इंडिया का यह सातवां एयर शो है लेकिन रक्षा विशेषज्ञ इस बात को खुले दिल से स्वीकार कर रहे हैं कि इससे पहले कभी देश में ऐसा एयर शो नहीं हुआ। कारण इसी रक्षा सौदे की चाह। होड़ अमरीकी और यूरोप की कंपनियों में ज्यादा है लेकिन देश की 200 से ज्यादा कंपनियां इसमें हिस्सा ले रही हैं। इनमें विमान सौदा हासिल करने का माद्दा कम ही झलक रहा है। लेकिन रेस में शामिल होकर अपनी ताकत का इजहार करने में कोई बुराई उन्हें नजर नहीं आ रही है। छह में से चार कंपनियां इस होड़ में शामिल हैं। गरज से पक्षी दहशत में हैं लेकिन सूचना टेक्नोलोजी का यह शहर धर्मसेना की धमकियों से बेपरवाह जमीन का डर मिटा आकाश पर टकटकी बांधे है। ऐसा मौका रोज-रोज नहीं मिलता। नंगी आंखों से ना ऐसे विमान देखने को मिलेंगे ना ही इन विमानों की सैर। ग्लैमर वर्ल्ड के दर्शन अलग से। (11.2.09)

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